डिस्ट्री(पेचिश )जैसे खतरनाक रोग के लिए जिम्मेदार ये कारण

डिस्ट्री (पेचिश )रोग – रोग घरेलु मक्खियों के कारण एक व्यक्ति से दुसरे में फैलता है जब भी हम खुले स्थान पर शौच करते है तब मक्खियों मल पर बैठती है और पेचिस के जीवाणु को अपने साथ एक स्थान से दुसरे स्थान अथवा खुली पड़ी  खाने की वस्तुओं तक पहुचाती है |जब कोई व्यक्ति खुली हुई खाने की वस्तुओं का सेवन करता है तब  पैरासाइटीस नामक परजीवी आंतो में संक्रमण को फैलाकर इस रोग को उत्पन्न  करते  है|इस रोग में पेट की आंतो में सुजन के कारण पेट में  तेज दर्द होने लगता है और आंतो में मरोड़आते है बार -बार दस्त के साथ सफेद चिकना प्रदार्थ निकलता रहता है जैसे -जैसे ये रोग पुराना होता जाता है वैसे -वैसे दस्तों की संख्या बढ़ती जाती है |साथ ही दस्त के साथ ब्लड (खून )भी आने लगता है |

विश्व स्वास्थ्य संगठन (W.H.O.)के अनुसार पेचिश को दो भागों में बांटा जाता है |

दण्डाणुका पेचिश –इस रोग में  दस्त के साथ ब्लड अधिक मात्रा में निकलता है दस्त के साथ पेट में तेज दर्द होना मरोड़े आना दस्त की वजह से रोगी को बुखार भी आने लगता है |रोगी की शारीरिक शक्ति खत्म होने से रोगी कमजोर और थका हुआ दिखाई  देता है |

अमीबिक  पेचिश – ये रोग Entamoeba हिस्टोलिटिया के कीटाणु गंधे पानी के माध्यम से हमारी आंतो में जाकर सफ़ेद चिकना प्रदार्थ पैदा करते है इस रोग में दिन में 10 -15 बार दस्त लगती है और दस्त की इच्छा भी होती है|दस्त के साथ ब्लड अथवा सफेद चिकना प्रदार्थ निकलने लगता है |

डिस्ट्री(पेचिश)रोग का कारण –

दूषित जल और सब्जियों के सेवन करने से |

खुले में शौच अथवा मल त्याग करने से |

संक्रमित व्यक्ति के सम्पर्क में आने से |

घरों के आस -पास साफ सफाई के नहीं होने से |

घरेलू मक्खियों  के कारण |

डिस्ट्री (पेचिश ) रोग के लक्षण –

पेट में तेज दर्द के साथ मरोड़े आना |

शरीर में कमजोरी महसूस होना थकान आना |

जी मचलाना शरीर में पानी की कमी आना |

खून वाली उल्टी होना और बुखार आना |

इस रोग में बार -बार दस्त लगना और दस्त के साथ ब्लड खून आना |

डिस्ट्री (पेचिश ) रोग का घरेलु और आयुर्वेदिक उपचार –

सोंठ 10 ग्राम –,जीरा10 ग्राम  ,काली मिर्च10 ग्राम  ,और 10 ग्राम सेंधा नमक सभी समान मात्रा में लेकर चूर्ण बनाले इस चूर्ण को अच्छे से पीसकर 5 -5 ग्राम की मात्रा में दिन में दो से तीन बार हल्के गर्म पानी के साथ सेवन करने से डिस्ट्री (पेचिश ) रोग दूर होता है |

दाना मेथी –100 ग्राम की मात्रा में अच्छे से पीसकर चूर्ण बनाए इस चूर्ण को किसी बोतल में डालकर रखे जब भी पेट में दर्द हो उस समय 5 ग्राम की मात्रा में मेथी के चूर्ण और 100 ग्राम दही मिलाकर खाने से पेचिश के कारण पेट के दर्द और मरोड़े में राहत मिलेगी |

ईसबगोल –डिस्ट्री (पेचिश ) रोग  में नित्य रात को सोते समय एक गिलास पानी के साथ 10  ग्राम ईसबगोल की भूसी को फाकने से पेचिश रोग दूर होता है |

फिटकरी-डिस्ट्री (पेचिश ) रोग में 20 ग्राम फिटकरी और 3 ग्राम अफीम पीसकर अच्छे से मिलाकर सुबह -शाम 2 -3 रीती की मात्रा में एक गिलास पानी के साथ सेवन करने से इस रोग को दूर किया जा सकता है |

बबुल का गोंद –डिस्ट्री (पेचिश ) रोग को दूर करने के लिए एक गिलास गर्म पानी में 10 ग्राम बबुल का गोंद डालकर रखे जब गोंद  फुल जाए तब गोंद को पानी में मसलकर सेवन करने से पेचिस रोग दूर होता है |

बेल गिरी का गुदा –एक गिलास ताजी छाछ में बेलगिरी का गुदा मिलाकर पीने से डिस्ट्री और पेचिस रोग दूर के कारण दस्त के साथ ब्लड निकलता है वो दूर होगा और पेट की ठंडक बनी रहेगी |

अनार का छिलका –एक गिलास गाय के दूध में अनार के छिलके को डालकर अच्छे से उबाले जब दूध एक तिहाई रेह जाऐ तब इस मिश्रण को छानकर दिन में तीन बार पीने से कुछ ही दिनों में डिस्ट्री और पेचिश रोग दूर होता है |

सहजन की फलियों -के रस में थोडा सा शहद और एक गिलास नारियल पानी मिलाकर दिन में दो से तीन बार पीने से डिस्ट्री और पेचिश रोग दूर होता है |

आम की गुठली –डिस्ट्री अथवा पेचिश रोग में आम की गुठली की गिरी 50 ग्राम और जामुन की गुठली 50 ग्राम की इन दोनों को पीसकर चूर्ण बनाऐ नित्य दिन में तीन बार एक गिलास गुनगुने पानी  के साथ 6 ग्राम की मात्रा में सेवन करने से पेचिश रोग जल्द ही दूर होता है |

छाछ –एक गिलास छाछ में स्वाद अनुसार सेंधा नमक ,आधा चम्मच भूना हुआ जीरा एक चुटकी काली मिर्च का पाउडर मिलाकर नित्य दिन में दो बार पीने से डिस्ट्री अथवा पेचिश रोग दूर होता है |

भूनी सौंफ –100ग्राम ,मिश्री 100 ग्राम ,100 ग्राम बिना भूनी सौंफ इन सब को अच्छे से पीसकर चूर्ण बनाऐ नित्य 6 ग्राम की मात्रा दिन में चार बार सेवन करने से पेचिश रोग दूर होता है |

 

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